बेचारा अमीर
आदत पड़ गई गरीब को बिन पैसे के रहने की
क्या करे अमीर बेचारा बिन पैसे रह पाए नहीं!
जब जब छलके अंतरमन,भावोंं की हो गुंजन,शब्द घटाओं से उमड़ घुमड़, रचते निर्मल ...'काव्यगगन'! यह रेणु आहूजा द्वारा लिखा गया ब्लाग है .जो कि उनकि निजि कवितओं का संग्र्ह है!it is a non profitable hobby oriented blog.containing collection of hindi poetries.
सत्य कटु पर कभी कभी मात्र गरल होता है
अगर मेरे शब्द