कमाई

मैं बस में बैठी राजेन्द्र नगर से गुज़र रही थी
बस ट्रैफ़िक जाम में फंसी दो दुकानों के आगे खड़ी थी
एक थी मुन्ना भाई कसाई की, दूसरी राव टेलर सिलाई की
दोनों अपनी दुकानों में तन्मयता से अपने काम में लगे थे
एक, बोटियां काट कर हिसाब किताब से तराजू में तोल रहा था
दूजा बडे़ जतन से कपड़े की बांह बना कर कंधे से जोड़ रहा था
पहला बनी बनाई रचना के टुकड़े कर रहा था
दूजा रचना रचने के लिये टुकड़े सिल रहा था
पहला ईशवर के बनाए तंतुओं को कर रहा था सपाट
दूजा, सपाट तंतुओं को काट, सिल रहा था तन का लिहाफ़
दोनों क बस एक ही लक्ष्य था, जोड़ से या तोड़ से होनी चाहिये कमाई
धंधे की पसंद से बड़ी पेट की आग, धंधा सिलाई हो या कसाई..!!!
-रेणू आहूजा
(यह रचना प्रकाशित हो चुकी है.)
15 Comments:
adhyayan....
haalanki tulanaatmak hai
lekin prastuti bahut achhee hai
sb jn apni dhun mein,, apne kaam mei lage hain....
abhivaadan .
रेणू जी,
बहुत सुंदर रचना .....बधाई
रीतेश
sach kahaa aapne....
धंधे की पसंद से बड़ी पेट की आग
achhee rachnaa hai .
abhivadan .
bhut khub....kya sachai kaha aap ne.
news
aaj ke daur me agar paisa kamana hai to kuchh bhi kaam karna hoga ye koi bura kaam nahi hai wo uska kaam hai ...
really good post i like this post........
really nice article i love to read this......
Very Nice renu ji... Thanks a lot Renu ji for this posting
Very Nice renu ji... Thanks a lot Renu ji for this posting
रेणु जी ! आप आजकल क्या लिख पढ़ रही हैं?
behtareen...
जिंदगी का ये जोड़ तोड़ ..बहुत पसंद आया
बहुत खूब
बहुत सुन्दर रचना ... जिंदगी के दो अलग अलग पहलुओं पे आपने बखूबी प्रकाश डाला है ..
Aap sabka shukriyaa,
'KAMAAI' ko samjhaney ka,
ek ehsaass thaa,
kiyaa thaa saanjhaa
aapkey antarman tak,
jaa pahunchaa.....''''
.....shukriya,
-renu.
Bahut sunder rachna hai, Renuji. Badhai
Post a Comment
<< Home