बैंगन (हास्य व्यंग्य कविता)

बात तब की है,
जब सुबह के पांच बजे थे
हम अभी अभी ब्रश करके हटे थे,
कि हमारी परम पूज्य माता जी ने आवाज़ लगाई
मैं एक आग्याकारिणी की भांति उनके पास चली आई
"आज बैंगन बनेंगे " ये आदेश दे कर वे चली गईं
इस आपात कालीन सूचना की खबर पाकर
हम ठगे से रह गए वहीं के वहीं
अभी हम भून ही रहे थे बैंगनों को
कि एक दर्द भरी आवाज़ आई " हमें बचा लो "
हम बैंगन नहीं , हम हैं अफ़्रीका के अशेवत
यहां आग में भूने जा रहे हैंवहां गोलियों से भूनते हैं हमें शवेत
इंसान , इंसान के ही हाथों ख़त्म होता जा रहा है ,
विश्व आज शीत युद्ध में भस्म होता जा रहा है,
आओ लड़ें मिल कर एक अनोखी जंग
जिसका रवैया कर दे हम सबको एक रंग
यही कहते थे मेरे मासूम बैंगन.
मेरे मासूम बैंगन.
... रेणू.
(यह कविता कई गोष्ठियों में सुनी जा चुकी है, और प्रशंसित हो चुकी है, साथ ही काव्यप्रतियोगिता मे प्रथम पुरस्कार प्राप्त कर चुकी है.)
10 Comments:
आओ लड़ें मिल कर एक अनोखी जंग
जिसका रवैया कर दे हम सबको एक रंग
रणू जी ...बहुत ही विचार परक कविता है ...अच्छा लगा...बधाई
Renuji
aapki kavita kafi badia hai,doosro ke liye jo dard aapke dil main hai,woh kavita ke madhyam se aap byan karti hai, achha laga
Isi tarah likhti rahe
take care
xyz
कहीं कुछ कमी है
Renuji,
मैनें आप का ब्लाग देखा। बहुत अच्छा लगा।आप
मेरे ब्लाग पर आयें,यकीनन अच्छा लगेगा और अपने विचार जरूर दें।प्लीज.............
Pahlee baar aayi hun aapke blogpe...bada achha laga..ab nirntartase aatee rahungi..!
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रीतेश जी, अग्यात जी, चतुर्वेदी जी और शमा आप सबकी टिप्पणियों के लिये शुक्रिया. काफ़ी समय से ब्लाग नहीं लिख पा रही हूं फ़िर भी जब आप सब ब्लाग पर आते हैं तो अच्छा लगता है. और भी कुछ लिखूंगी तो कुछ बात बने.
बहरहाल आप सब का धन्यवाद.
-रेणू.
wakai prashansniya rachna , bahut bahut badhaai.
"आज बैंगन बनेंगे " ये आदेश दे कर वे चली गईं
इस आपात कालीन सूचना की खबर पाकर
हम ठगे से रह गए वहीं के वहीं........
चेहरे पर मुस्कान आई,पर थम गए ,
हम बैंगन नहीं , हम हैं अफ़्रीका के अशेवत..........
पुरस्कृत कैसे ना होगी यह भावना
aap shayad pahali baar aai rahi aur main bhi magar behad khushi hui itni shaandar rachna ko padhkar milte rahe isi tarah isi umeed ke saath dhero badhai .
kavita acchi hai dost
aasha aur post aane ki aapke duaara
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