चक दे इंडिया वर्ल्ड़ कप २००७

माही भज्जी यूवी जोगिन्दर
ले आए कप घर के अन्दर
जुड़ा इतिहास में नया ताज
जीत लिया फ़िर कप आज
कपिल मदन भी झूमे आज
लार्ड्स की उनको आगई याद
एसा कमाल किया गंभीर
ताने तूने जीत के तीर
जोहानसबर्ग में ट्वंटी ट्वंटी
देश भर में खुशी की घंटी
चमकी फ़िर से देश की शान
किया कमाल अब तूने पठान
वर्ल्ड कप भारत की आन
धड़का मिलकर हिन्दुस्तान
कांटे की टक्कर चाहे मिली थी
यकीं की हममें कमी नही थी
सईंयो माही झूमे जिया
चक दिये फ़ट्टे तूने ईंडिया
मिले दुआ मे करोड़ों हाथ
यही हिंद की जीत का राज़
-रेणू आहूजा
Labels: cricket, hindi poem on cricket, world cup 20-20
3 Comments:
"वर्ल्ड कप भारत की आन
धड़का मिलकर हिन्दुस्तान
कांटे की टक्कर चाहे मिली थी
यकीं की हममें कमी नही थी"
अरे वाह-वाह रेणू जी ...बहुत अच्छा लिखा है...
आपकी कविता से आपके ह्रदय की भावना बड़ी है
इसलिये आपकी कविता क्या खूब खिली है
आपको फ़िर से लिखता देखकर मन प्रसन्न हो गया
भारत की इस शानदार जीत पर आपको ढेर सारी
बधाईयाँ.....आशा है भविष्य में भी आपकी कविता का आनंद मिलता रहेगा..
शुक्रिया रीतेश जी,
हालात का तकाज़ा है,
कभी हर बात पर कलम मेहरबान
कभी लंबी खामोशी भी
कलम की ज़ुबान...!!!
बस आज काफ़ी दिनों बाद एक एसी खुशी देखने को मिली कि हर शख्स खुश नज़र आया और लेखनी बोल उठी ! हिन्दुस्तान की इस जीत की सभी को बधाई हो.
-रेणू.
रेणू जी,
आपकी कविता शायद नारद पर नहीं दिख रही है
आप नारद को sunonarad@gmail.com पर email कर सूचित कर सकती हैं
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