
रंग ले मन,
छाई उमंग,
झन झनन झनन,
खन खनन,
उड़ता गुलाल सब लाल लाल, ................सब लाल लाल............!!!
होली के रंग,
उठे मन तरंग,
गुल नार नार ,
आई बहार,
बदहाल हाल, सब लाल .....................सब लाल...............!!!!!!!!!!
भांग संग , उडता जो रंग
कभी रंग संग, कभी रंग भंग
कभी सब हैं संग
रंगे हुए सब बाल टाल, सब लाल लाल........................सब लाल !!!!!!!!!!!
कहीं चुपके रंग,
कहीं उनके संग,
कहीं अलग अलग
कहीं अलख अलख
बजे झमक झमक सुर लय की ताल..........सब लाल.............सब लाल.............!!!!!
बसंत बाद,
फ़ागुन के फ़ाग
बैसाखी साथ
त्योहार राग,
झूमे धरा, झूमे गगन,
रंगे रंगे राधा गोपाल ,..................सब लाल............सब लाल !!!!!!!
रस की फ़ुहार
ब्रज की पुकार
हर नर-नार
मन की चुभन
हुई हनन हनन ले नेह दुशाल ...............सब लाल सब लाल................!!!!!!
कोयल की कूक
हिया हूक हूक
रचे रंग रंग
बेढ़ंगढंग रंग घन-सघन
है सबका हाल...........बस लाल लाल है सबका हाल..........बस लाल !!!!!!!!!
Labels: fagun., gulaal, holi, rang
5 Comments:
कहीं चुपके रंग,
कहीं उनके संग,
कहीं अलग अलग
कहीं अलख अलख
Wah !! Bahut sunder shabdo.n ka chayan kiya hai. Badhaayee...
Aapki aur kavitao.n ki pratiksha rahegii.
p k kush 'tanha'
Nice. Keep it up.
Pahlee baar aayee hun aapke blog pe..! Sundar! Bas yahee ek shabd soojh raha hai!
Aap gar 'word verification' hata den,to achha rahega!
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Very nice ....excellent
I m nilesh vasudev patel
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Learning bansuri.. Got your massage.thank u very much for watching my videos and for such inspiration
thanks nilesh ji ...aap jaisey achey kalakaar sadaa hi samman ke yogya hain.
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