तुम

राधे कृष्णा से कहने लगी एक दिन
कैसे दिल में उतर कर चले आए तुम
पहले अपनें में रहती थी खोई हुई
अब तेरे ख्यालों में रहती हूं गुम
इस दिल का ये आलम कैसे कहूं
मुझ को मुझी से चुरा लाए तुम
अधिकारों का मैने किया था वरण
कर्तव्यों की भूमि पर ले आए तुम
अनजाना सा मैनें था समझा तुम्हें
मुझे अपना बना कर चले आए तुम
पहले मुश्किल थी राहें लगती बड़ी
मुशकिलों को ही राहें बना लाए तुम
कृष्णा कृष्णा थी राधा रटती कभी,
कृष्णा राधे में अंतर हुआ कैसे गुम
समर्पण हो मन का इस तरह
'मैं' ना रहे ना ही रह जाए' तुम'
-रेणू