बसेरा

पर्वतों की गोद में
हो पेड़ों की झुरमुट एक.
बहती नदी संग में
और चहकती बुलबुल एक
प्रकृति अपनी, हम उसके
काक गान जहां गीत लगे
सुबह का सूरज हो सुनहला
मीठी शांति साथ रहे
धरती अम्बर हों साथ वहां
बहती नदिया का गीत सुने
गगन के तारे झुके जहां
अनबोला संगीत झरे
प्रकृति की एसी बाहों मे
रुपहला एक बसेरा हो
सूरज की पहली किरणों से
उस घर में नित सवेरा हो
धरती, अंबर ,चांद ,अरूण
लगें हमजोली और हमदम
तेरा हो या मेरा हो
सुंदर एक बसेरा हो!!!
-रेणु.