कमाई

मैं बस में बैठी राजेन्द्र नगर से गुज़र रही थी
बस ट्रैफ़िक जाम में फंसी दो दुकानों के आगे खड़ी थी
एक थी मुन्ना भाई कसाई की, दूसरी राव टेलर सिलाई की
दोनों अपनी दुकानों में तन्मयता से अपने काम में लगे थे
एक, बोटियां काट कर हिसाब किताब से तराजू में तोल रहा था
दूजा बडे़ जतन से कपड़े की बांह बना कर कंधे से जोड़ रहा था
पहला बनी बनाई रचना के टुकड़े कर रहा था
दूजा रचना रचने के लिये टुकड़े सिल रहा था
पहला ईशवर के बनाए तंतुओं को कर रहा था सपाट
दूजा, सपाट तंतुओं को काट, सिल रहा था तन का लिहाफ़
दोनों क बस एक ही लक्ष्य था, जोड़ से या तोड़ से होनी चाहिये कमाई
धंधे की पसंद से बड़ी पेट की आग, धंधा सिलाई हो या कसाई..!!!
-रेणू आहूजा
(यह रचना प्रकाशित हो चुकी है.)