तिरंगे को नमन

तीन रंग का झंड़ा एक ये
क्यूं लगता इतना प्यारा
एसा क्या इस झंड़े में
कुर्बान देश है सारा
रंग केसरी एसा तेजोमयी
दिये एसे सैनानी
मंगल पांड़े, कभी भगतसिंह,
कभी झांसी की रानी
एक एक बूंद लहू की अपनी
दे के वीर मुस्काए,
आज़ादी की सांसें दे हमें
दी अपनी सांसें लुटाए
एसी तिरंगे की ताकत,
वारे लाखों इस पर जाएं
जब भी देश पर आए संकट
वंदेमातरम गाएं
लिये सफ़ेदी मेरा तिरंगा
शांति गीत जब गाए
भारत ही क्या,इस पर सारी
धरा कुटुंब बन जाए
लिये खुशहाली रंग हरियाली,
लहरा खेतों से से आए,
झूमझूम महक माटी की
तिरंगा दे बतलाए
हर जन,हर गण,
हर मन वंदन करे भारती गान
'वंदे मातरम ' दो शब्दों में
दमके हिंद की शान
एसा तिरंगा जादू भरा ये
जब जब है लहराता
हर बोली हर धर्म का
संगम दुनिया को दिखलाता
बंग, मराठी, उत्कल सिधी,
जो नदिया की मौजें,
कशमीर,हिमाचल,बुंदेले
सब एक धारा में सोचें
नहीं अलग हम,
जय हिंद गणतंत्रम
वेद संस्कृति संगम
एक ही धुन मे बोलें
मिल कर वंदे, वंदेमातरम....!
8 Comments:
सुंदर रचना और स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई स्विकारें.
समीर लाल
सुंदर...आपको स्वतंत्रता दिवस की बधाई.
समीर जी,
स्वतंत्रता दिवस की
बधाई आपको भी,
धन्यवाद जो रचना
आपने पसंद की,
सच तो यह है कि,
जब जब तिरंगे पर
कुछ लिखा जाएगा,
हर भारतवासी गौरान्वित हो जाएगा....!!!
Zhanda uncha rahe hamara, yehi hai har bharat vasi ka nara, acha likha hai renuji, kafi din ke baad aapki kavita post hui,aap lagta hai busy bahut thee
XYZ
bahut sundar rachna likhi hai renu ji
Excellent poem, the flow is just excellent.
Excellent Poem,pls keep writing.
Tirange ko naman yah bahut achhi aur tochy rachna hai...
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